क्यूबा के राष्ट्रपति पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजिंग ने वाशिंगटन के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका को अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और एकतरफा प्रतिबंध लगाने की नीति छोड़नी चाहिए। चीन ने आरोप लगाया कि अमेरिका अपनी ताकत का इस्तेमाल कर छोटे देशों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों के सिद्धांतों के खिलाफ है।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि क्यूबा पर लंबे समय से लगाए जा रहे प्रतिबंधों ने वहां के लोगों के जीवन और आर्थिक विकास को प्रभावित किया है। उन्होंने अमेरिका से आग्रह किया कि वह क्यूबा के खिलाफ प्रतिबंधों और आर्थिक नाकेबंदी को समाप्त करे तथा समानता और आपसी सम्मान के आधार पर संबंध विकसित करे। चीन ने क्यूबा की संप्रभुता और स्वतंत्र विकास के अधिकार का समर्थन भी दोहराया।
इस मुद्दे पर चीन और अमेरिका के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। विश्लेषकों का मानना है कि क्यूबा को लेकर दोनों देशों के रुख में लंबे समय से मतभेद रहे हैं और हालिया प्रतिबंधों के बाद यह विवाद और गहरा सकता है। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर कई भू-राजनीतिक चुनौतियां मौजूद हैं, क्यूबा का मुद्दा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में आ गया है।





