देश की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि (IIP) अप्रैल महीने में धीमी पड़ गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production) की वृद्धि दर 4.9 प्रतिशत दर्ज की गई, जो पिछले कुछ महीनों की तुलना में अपेक्षाकृत कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि विनिर्माण और कुछ प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन की रफ्तार कम होने का असर समग्र वृद्धि पर पड़ा है।
इस बीच केंद्र सरकार ने IIP की गणना के लिए आधार वर्ष में बदलाव की घोषणा की है। नए आधार वर्ष के जरिए औद्योगिक गतिविधियों की अधिक सटीक तस्वीर सामने लाने और अर्थव्यवस्था की वर्तमान संरचना को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करने का प्रयास किया गया है। सरकार का कहना है कि संशोधित आधार वर्ष से आंकड़ों की विश्वसनीयता और प्रासंगिकता बढ़ेगी।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, औद्योगिक उत्पादन में आई यह सुस्ती अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है, हालांकि बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और उपभोक्ता मांग से जुड़े क्षेत्रों में सुधार की संभावनाएं बनी हुई हैं। आने वाले महीनों में औद्योगिक उत्पादन की दिशा घरेलू मांग, निवेश और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।


