नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच देश की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से सात के संयुक्त बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में 1.54 लाख करोड़ रुपये से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। इस दौरान निवेशकों की धारणा कमजोर रहने और बाजार में बिकवाली के दबाव का असर प्रमुख कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिला। सबसे बड़ा झटका रिलायंस इंडस्ट्रीज को लगा, जिसके मार्केट कैप में सबसे अधिक कमी दर्ज की गई।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कुछ क्षेत्रों में मुनाफावसूली के कारण बड़े शेयरों पर दबाव बना रहा। रिलायंस के अलावा कई अन्य दिग्गज कंपनियों के बाजार मूल्य में भी गिरावट आई, जिससे कुल मार्केट कैप में बड़ी कमी देखने को मिली। हालांकि कुछ कंपनियों ने इस दौरान बेहतर प्रदर्शन करते हुए अपने बाजार मूल्य में बढ़ोतरी भी दर्ज की।
विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में अल्पकालिक दबाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद और कॉरपोरेट क्षेत्र की दीर्घकालिक संभावनाएं सकारात्मक बनी हुई हैं। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की अस्थिरता के बीच सोच-समझकर निवेश करें और दीर्घकालिक रणनीति पर ध्यान केंद्रित रखें।


