Reserve Bank of India ने केंद्र सरकार को रिकॉर्ड 2.87 लाख करोड़ रुपये का लाभांश देने की घोषणा की है। यह अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड माना जा रहा है, जिससे सरकार की वित्तीय स्थिति को मजबूत समर्थन मिलने की उम्मीद है। आरबीआई के इस फैसले के बाद अर्थव्यवस्था और बाजारों में भी सकारात्मक संकेत देखने को मिल रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बड़ी राशि से सरकार को राजकोषीय घाटा नियंत्रित करने, इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में निवेश बढ़ाने और सामाजिक योजनाओं पर खर्च करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, सरकार पर अतिरिक्त कर्ज लेने का दबाव भी कम हो सकता है। माना जा रहा है कि इस फंड का उपयोग आर्थिक विकास को गति देने और पूंजीगत व्यय बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।
आरबीआई का लाभांश मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा भंडार प्रबंधन, बॉन्ड निवेश और अन्य वित्तीय गतिविधियों से होने वाली आय पर आधारित होता है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है और इससे निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हो सकता है। आने वाले बजट और सरकारी योजनाओं पर भी इस अतिरिक्त आय का असर देखने को मिल सकता है।


