Columbia University के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी AI आधारित तकनीक विकसित की है जो बांझपन से जूझ रहे पुरुषों के लिए बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई है। इस नई “STAR” (Sperm Tracking and Recovery) प्रणाली की मदद से उन शुक्राणुओं की पहचान संभव हो पाई है, जिन्हें पारंपरिक जांच में ढूंढ पाना बेहद मुश्किल होता है। शुरुआती परीक्षणों में इस तकनीक ने उल्लेखनीय सफलता दिखाई है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, कई मामलों में पुरुषों में शुक्राणु बहुत कम मात्रा में या छिपे हुए होते हैं, जिन्हें सामान्य लैब जांच से पकड़ना मुश्किल होता है। AI एल्गोरिद्म माइक्रोस्कोपिक स्तर पर लाखों इमेज का विश्लेषण कर बेहद कम संख्या में मौजूद शुक्राणुओं की पहचान कर सकता है। इससे IVF जैसे उपचारों की सफलता दर बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक पुरुष बांझपन के इलाज में बड़ा बदलाव ला सकती है। अगर आगे के परीक्षण सफल रहते हैं, तो आने वाले वर्षों में यह सिस्टम दुनिया भर में फर्टिलिटी ट्रीटमेंट का अहम हिस्सा बन सकता है और लाखों दंपतियों को माता-पिता बनने का मौका दे सकता है।


