स्मार्टफोन कंपनियों की कार्यप्रणाली को लेकर यूरोपियन यूनियन ने बड़ा कदम उठाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूरोपीय संघ ने उन आरोपों पर जांच तेज कर दी है जिनमें कहा जा रहा है कि कई कंपनियां जानबूझकर अपने स्मार्टफोन की उम्र सीमित रखती हैं, ताकि उपभोक्ता जल्दी नया फोन खरीदने को मजबूर हों। इस रणनीति को ‘प्लांड ऑब्सोलेसेंस’ कहा जाता है।
ईयू का कहना है कि यदि कंपनियां जानबूझकर डिवाइस की परफॉर्मेंस घटाने, सॉफ्टवेयर अपडेट सीमित करने या बैटरी लाइफ कम रखने जैसी रणनीतियां अपनाती हैं, तो यह उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। इसी के चलते यूरोप में ‘राइट टू रिपेयर’ और लंबी सॉफ्टवेयर सपोर्ट अवधि जैसे नियमों को सख्ती से लागू करने की तैयारी की जा रही है।
read also: मुनाफे की चमक से Wall Street रिकॉर्ड ऊंचाई पर, Iran तनाव से 100 डॉलर पार तेल ने बढ़ाई बाजार की चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि ईयू की इस कार्रवाई का असर वैश्विक स्मार्टफोन बाजार पर पड़ सकता है। अगर नए नियम लागू होते हैं, तो कंपनियों को लंबे समय तक अपडेट और रिपेयर सपोर्ट देना पड़ सकता है, जिससे उपभोक्ताओं को ज्यादा टिकाऊ और भरोसेमंद डिवाइस मिल सकेंगे।






