घर के अंदर की हवा को सुरक्षित माना जाता है, लेकिन हालिया शोध ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। वैज्ञानिकों के अनुसार हम हर दिन सांस के जरिए बड़ी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक कण शरीर में ले रहे हैं। इस अध्ययन ने दिखाया कि एक घन मीटर इनडोर हवा में सैकड़ों से हजारों माइक्रोप्लास्टिक कण मौजूद हो सकते हैं, जो फर्नीचर, कपड़ों, प्लास्टिक उत्पादों और घरेलू धूल से निकलते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये बेहद सूक्ष्म कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं और लंबे समय में स्वास्थ्य पर असर डाल सकते हैं। हालांकि इनके प्रभाव पर अभी और शोध जारी है, लेकिन World Health Organization समेत कई संस्थाएं माइक्रोप्लास्टिक को संभावित स्वास्थ्य खतरे के रूप में देख रही हैं। इन कणों का लगातार संपर्क श्वसन संबंधी समस्याओं और सूजन जैसी दिक्कतों से जुड़ा हो सकता है।
शोधकर्ताओं का सुझाव है कि घर में बेहतर वेंटिलेशन, HEPA फिल्टर वाले एयर प्यूरीफायर और नियमित सफाई से जोखिम कम किया जा सकता है। यह अध्ययन इस बात का संकेत है कि प्लास्टिक प्रदूषण अब सिर्फ पानी और मिट्टी तक सीमित नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की सांसों में भी शामिल हो चुका है।


