देश में एलपीजी की किल्लत के बीच एक राहत वाली खबर है। भारत में कुल खपत की लगभग 60 फीसदी रसोई गैस का अब घर में ही उत्पादन होने लगा है ऐसे में आम लोगों को भी बड़ी राहत मिल सकती है। 40 दिन के इस युद्ध में दुनिया के कई देशों की हालत खराब हो गई। भारत में रसोई गैस की किल्लत जरूर हुई लेकिन ज्यादा दिनों तक अफरा-तफरी का माहौल नहीं रहा। कालाबाजारी पर रोक लगने के बाद लोगों के घरों तक सिलेंडर पहुंचने लगे।
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पेट्रोलियम मिनिस्ट्री में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि राज्य सरकारों के सहयोग से अब पीएनजी पाइपलाइन का भी भी काम तेजी से चल रहा है। पिछले पांच सप्ताह में ही लगभग 4.41 लाख ने कस्टर रजिस्टर हुए हैं। उन्होंने कहा कि देश में एलपीजी की कमी नहीं है। कमर्शल सप्लाई बाधित हुई थी जो कि अब 70 फीसदी तक सुधर गई है। इसके अलावा अस्पतालों, शैक्षिक संस्थानों, होटल, ढाबा, फार्मा कंपननियों को प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।
लोगों को रसोई गैस वितरकों से सीधे गैस सिलेंडर लेने के लिए हतोत्साहित किये जाने के बाद से देश में ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग बढकर लगभग 98 प्रतिशत पहुंच गयी है। पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न स्थिति के बारे में जानकारी देने के लिए आयोजित संवाददाता सम्मेलन में विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि देश में विद्युत प्रणाली मज़बूत, विविधीकृत और अल्पकालिक तथा दीर्घकालिक मांग आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम है। अप्रैल से तापीय, जलविद्युत, नवीकरणीय, बीईएसएस और पीएसपी परियोजनाओं के कमीशनिंग में तेजी आई है।
98 फीसदी तक ऑनलाइन बुकिंग
देश में ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग लगभग 98 प्रतिशत तक बढ़ गई है। जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ देश भर में अभियान जारी है और गुरुवार को लगभग 1.2 लाख छापे मारे गये और 57,000 से अधिक सिलेंडर जब्त किए गए। पीएनजी कनेक्शनों को बढावा दिये जाने की मुहिम के तहत 4.05 लाख पीएनजी कनेक्शनों में गैस आपूर्ति शुरू की गयी और लगभग 4.41 लाख अतिरिक्त ग्राहकों ने नए कनेक्शनों के लिए पंजीकरण कराया है।
अधिकारियों ने बताया कि देश की स्थापित क्षमता 531 गीगावाट से अधिक है, जो एक सुविविधीकृत पोर्टफोलियो को दर्शाती है, जिसमें कोयला, नवीकरणीय, जलविद्युत और परमाणु स्रोतों का महत्वपूर्ण योगदान है, तथा गैर-जीवाश्म स्रोत 50 प्रतिशत से अधिक हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षमता को लगभग 5 लाख सर्किट किलोमीटर (सीकेएम) के मजबूत पारेषण ढांचे और 120 गीगावाट से अधिक अंतर-क्षेत्रीय स्थानांतरण क्षमता का समर्थन प्राप्त है, जिससे क्षेत्रों के बीच विश्वसनीय विद्युत प्रवाह सुनिश्चित होता है।


