पश्चिम एशिया में युद्ध विराम के बाद भी तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब दुनिया की नजरें एक बार फिर Strait of Hormuz पर टिक गई हैं, जिसे वैश्विक तेल आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर संभावित “टोल” या अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने की चर्चा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
बताया जा रहा है कि इस कदम से तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। United States इस मुद्दे को लेकर खास तौर पर चिंतित है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से की ऊर्जा आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है। किसी भी तरह की बाधा या अतिरिक्त लागत का सीधा असर तेल कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज में तनाव बढ़ता है तो शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम में तेजी आ सकती है, जिसका असर कई देशों के व्यापार और महंगाई पर पड़ेगा। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस रणनीतिक जलमार्ग पर स्थिरता बनाए रखने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करने पर जोर दे रहा है।


