केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) की ब्याज दर में लंबे समय से कोई बदलाव नहीं हुआ है। Government of India ने लगातार छठे साल भी GPF की ब्याज दर 7.1% पर ही बरकरार रखी है, जिससे लाखों कर्मचारियों को राहत की उम्मीदों को झटका लगा है। बढ़ती महंगाई और बदलते निवेश विकल्पों के बीच कर्मचारियों को ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई दर और अन्य छोटी बचत योजनाओं की तुलना में GPF की ब्याज दर स्थिर रहने से कर्मचारियों की वास्तविक बचत पर असर पड़ रहा है। सरकारी कर्मचारियों के संगठनों ने भी कई बार ब्याज दर में बढ़ोतरी की मांग उठाई है, ताकि रिटायरमेंट सेविंग्स पर बेहतर रिटर्न मिल सके।
फिलहाल सरकार की ओर से दर बढ़ाने का कोई संकेत नहीं मिला है, जिससे कर्मचारियों में निराशा बनी हुई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में आर्थिक हालात और महंगाई के आंकड़ों को देखते हुए इस पर पुनर्विचार किया जा सकता है।


