रायपुर/दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी का मामला संयुक्त सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया है। अमित जोगी ने X में वीडियो पोस्ट कर बताया कि आज माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के 25.03.2026 और 02.04.2026 के दोनों निर्णयों को एक साथ जोड़ते हुए 20.04.2026 को संयुक्त सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। आज की सुनवाई में मेरे पक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तन्खा और सिद्धार्थ दवे ने प्रभावी रूप से पक्ष रखा। मैं सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश का स्वागत करता हूँ। मुझे पूर्ण विश्वास है कि मेरे साथ हुआ गंभीर अन्याय अब सुधारा जाएगा। सत्य और न्याय की जीत अवश्य होगी।
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आज माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के 25.03.2026 और 02.04.2026 के दोनों निर्णयों को एक साथ जोड़ते हुए 20.04.2026 को संयुक्त सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
आज की सुनवाई में मेरे पक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ता श्री कपिल सिब्बल, श्री मुकुल रोहतगी, श्री विवेक तन्खा और… pic.twitter.com/Bn6JiMCeym
— 𝐀𝐦𝐢𝐭 𝐀𝐣𝐢𝐭 𝐉𝐨𝐠𝐢 (@AmitJogi) April 6, 2026
जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को आजीवन कारावास की हुई सजा
साल 2003 के चर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सीबीआई की अपील (ACQA No. 66/2026) को स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया। हाईकोर्ट ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और धारा 120-बी (अपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी ठहराया है। कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में छह माह की अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है।
हाईकोर्ट का यह फैसला 31 मई 2007 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को पूरी तरह पलट दिया है। उस समय स्पेशल जज (एट्रोसिटी) रायपुर ने अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि चिमन सिंह, याह्या ढेबर, अभय गोयल और फिरोज सिद्दीकी सहित अन्य 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि “एक ही गवाही के आधार पर कुछ आरोपियों को दोषी ठहराया जाना और मुख्य साजिशकर्ता को बरी कर दिया जाना कानूनी रूप से असंगत और गलत है।” बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामला रीओपन किया गया था, जिसके बाद हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई थी।


