रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाला किचन स्पंज अब एक नए पर्यावरणीय खतरे के रूप में सामने आया है। हालिया अध्ययनों में पाया गया है कि बर्तन धोने के दौरान सिंथेटिक स्पंज से बड़ी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक कण निकलते हैं, जो पानी के साथ नालियों और जल स्रोतों तक पहुंच रहे हैं। यह सूक्ष्म प्लास्टिक कण आंखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बन रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, जब स्पंज घिसता है या गर्म पानी और डिटर्जेंट के संपर्क में आता है, तो उससे हजारों-लाखों माइक्रोप्लास्टिक कण निकल सकते हैं। ये कण जल शोधन प्रणालियों से पूरी तरह फिल्टर नहीं हो पाते और नदियों, झीलों और समुद्र तक पहुंच जाते हैं, जहां वे जलीय जीवों के शरीर में प्रवेश कर खाद्य श्रृंखला का हिस्सा बन जाते हैं।
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पर्यावरणविदों ने लोगों को प्लास्टिक स्पंज के बजाय प्राकृतिक विकल्प जैसे नारियल रेशा, लूफा या बायोडिग्रेडेबल ब्रश अपनाने की सलाह दी है। छोटे-छोटे बदलावों से माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण को कम किया जा सकता है और जल स्रोतों को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।


