भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट दर्ज की गई है और यह 700 अरब डॉलर के स्तर से नीचे आ गया है। इस बीच वित्तीय प्रणाली में तरलता बनाए रखने के लिए Reserve Bank of India (RBI) ने 65,322 करोड़ रुपये डालने का कदम उठाया है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह कदम बाजार में नकदी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए अहम माना जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट के पीछे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव जैसे कारण बताए जा रहे हैं। हालांकि, RBI का कहना है कि देश की बाहरी वित्तीय स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है और किसी तरह की घबराहट की जरूरत नहीं है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम India की अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में मदद करेगा। आने वाले समय में वैश्विक बाजार के रुख के आधार पर विदेशी मुद्रा भंडार और तरलता प्रबंधन पर नजर बनी रहेगी।


