मौसमी आपदाओं की बढ़ती घटनाओं के बीच जलवायु संकट को कम आंकना गंभीर खतरे का संकेत माना जा रहा है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन से जुड़ी खबरों और कवरेज में लगभग 14% की गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट चिंताजनक है, क्योंकि दुनिया भर में बाढ़, सूखा, हीटवेव और जंगल की आग जैसी आपदाएं लगातार बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक मीडिया कवरेज में कमी का असर आम लोगों की जागरूकता और नीति निर्माण दोनों पर पड़ सकता है। जलवायु संकट को लेकर सार्वजनिक चर्चा कम होने से सरकारों और संस्थाओं पर दबाव भी घटता है, जिससे जरूरी कदमों में देरी हो सकती है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते व्यापक जागरूकता नहीं बढ़ाई गई, तो भविष्य में आपदाओं का असर और गंभीर हो सकता है।
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रिपोर्ट में सरकारों, मीडिया और समाज से मिलकर जलवायु परिवर्तन पर ध्यान बढ़ाने की अपील की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, नीतिगत फैसले और व्यक्तिगत स्तर पर छोटे-छोटे प्रयास ही इस वैश्विक संकट से निपटने का सबसे प्रभावी रास्ता हैं।


