प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में आयुष्मान भारत योजना से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है। जांच एजेंसी के अनुसार, एक फर्जी अस्पताल के जरिए लाभार्थियों को मात्र 300 रुपये देकर उनके नाम पर इलाज दिखाया गया और कुल 778 नकली क्लेम डालकर करीब 64 लाख रुपये की हेराफेरी की गई। इस मामले ने सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ED की शुरुआती जांच में पता चला है कि इस फर्जीवाड़े में अस्पताल संचालकों ने गरीब और अनजान लोगों को निशाना बनाया। उन्हें छोटी रकम का लालच देकर उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और बिना किसी वास्तविक इलाज के क्लेम पास कराए गए। एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है, जिसमें कई अन्य लोगों और संस्थाओं के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों से न सिर्फ सरकारी धन का नुकसान होता है, बल्कि जरूरतमंद मरीजों तक योजनाओं का लाभ पहुंचने में भी बाधा आती है। ED की कार्रवाई के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इस घोटाले से जुड़े सभी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाएगा।


