पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने ऊर्जा और खाद्य प्रबंधन को लेकर अहम निर्णय लिया है। भारत सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में टूटे चावल की हिस्सेदारी कम करने का फैसला किया है। सरकार का उद्देश्य खाद्यान्न के बेहतर उपयोग के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है, खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
सरकार के अनुसार, अब बड़ी मात्रा में टूटे चावल का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन के लिए किया जाएगा। इससे पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा मिलेगा और आयातित तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। इस कदम से किसानों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी और वैकल्पिक उपयोग के नए रास्ते खुलेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला दोहरे फायदे वाला है—एक तरफ ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और दूसरी ओर खाद्यान्न का बेहतर प्रबंधन संभव होगा। सरकार आने वाले समय में एथेनॉल उत्पादन को और बढ़ाने के लिए नई नीतियों और निवेश को भी प्रोत्साहित कर सकती है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।


