नई दिल्ली। गुरुग्राम में चार साल की बच्ची के साथ कथित यौन उत्पीड़न के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने जांच के दौरान “असंवेदनशीलता” बरतने पर पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसे मामलों में अधिक सतर्कता और संवेदनशीलता अपेक्षित होती है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने गुरुग्राम पुलिस आयुक्त को 25 मार्च को पूरी जांच रिपोर्ट के साथ अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है। अदालत ने संकेत दिए कि जरूरत पड़ने पर मामले की जांच के लिए वरिष्ठ महिला अधिकारियों की विशेष जांच टीम (SIT) गठित की जा सकती है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया में कई गंभीर खामियां रहीं। बच्ची से बयान दर्ज करने के तरीके, आरोपियों की पहचान प्रक्रिया और अभिभावकों की भूमिका को लेकर अदालत ने सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में पीड़ित को अनावश्यक मानसिक दबाव में नहीं डाला जाना चाहिए।
पीठ ने पुलिस से पूछा कि क्या कानून के मूल सिद्धांतों का पालन किया गया और समय पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि शिकायत मिलने पर तुरंत प्राथमिकी दर्ज करना पुलिस का कर्तव्य है।
मामले में आरोप है कि अपार्टमेंट में काम करने वाली दो घरेलू सहायिकाएं और उनके सहयोगी इस घटना में शामिल थे। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट नजर बनाए हुए है।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड अगली सुनवाई में प्रस्तुत किए जाएं। साथ ही, मजिस्ट्रेट द्वारा बच्चे का बयान दर्ज करने के तरीके को लेकर भी रिपोर्ट मांगी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जरूरत पड़ने पर आगे सख्त कदम उठाए जाएंगे।


