बस्तर अब अपनी नई पहचान गढ़ रहा है, जहां कभी अशिक्षा और हिंसा की चुनौतियां थीं, वहीं अब शिक्षा और साक्षरता की मजबूत लहर दिखाई दे रही है। ‘उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत आयोजित महापरीक्षा इस बदलाव का बड़ा उदाहरण बनी, जिसमें जिले के 25,706 परीक्षार्थियों ने 812 केंद्रों पर भाग लिया।
यह आयोजन केवल परीक्षा नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए नई शुरुआत है जो किसी कारण शिक्षा से दूर रह गए थे। कलेक्टर आकाश छिकारा के अनुसार, यह पहल बुजुर्गों और युवाओं के लिए आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता बढ़ाने का माध्यम बन रही है।
महापरीक्षा की खास बात सामाजिक समावेशिता रही। जगदलपुर केंद्रीय कारागार के 141 बंदियों और मुख्यधारा में लौटे 28 पूर्व माओवादियों ने भी परीक्षा में भाग लिया। 2011 में करीब 57% रही साक्षरता दर अब लगातार सुधर रही है।
यह पहल दिखाती है कि बस्तर में बंदूक की जगह अब किताब और कलम भविष्य तय कर रहे हैं, और शिक्षा बदलाव की सबसे मजबूत ताकत बनकर उभर रही है।


