हर साल मार्च में मनाया जाने वाला World Sleep Day लोगों को अच्छी और पर्याप्त नींद के महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए समर्पित है। विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल उपकरणों के बढ़ते उपयोग ने खासकर युवाओं की नींद पर गहरा असर डाला है। देर रात तक मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और ऑनलाइन कंटेंट देखने की आदत के कारण नींद का समय कम हो रहा है, जिससे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नींद की कमी सीधे तौर पर मानसिक समस्याओं जैसे Depression और Anxiety Disorder से जुड़ी हुई है। लगातार कम नींद लेने से तनाव बढ़ता है, एकाग्रता घटती है और कई मामलों में आत्महत्या की प्रवृत्ति तक देखने को मिलती है। खासकर किशोरों और युवाओं में देर रात तक स्क्रीन देखने की आदत उनकी जैविक घड़ी को प्रभावित कर रही है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बेहतर नींद के लिए रात में सोने से कम से कम एक घंटे पहले डिजिटल उपकरणों से दूरी बनानी चाहिए, नियमित समय पर सोने-जागने की आदत डालनी चाहिए और संतुलित जीवनशैली अपनानी चाहिए। उनका मानना है कि पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद न केवल मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है, बल्कि पढ़ाई, काम और दैनिक जीवन की उत्पादकता भी बढ़ाती है।


