कोरबा। जिले के उपार्जन केंद्रों से धान उठाव के लिए 28 फरवरी अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी, लेकिन समय सीमा बीतने के बाद भी उठाव कार्य पूरा नहीं हो सका। वर्तमान में विभिन्न केंद्रों में 3 लाख 92 हजार क्विंटल धान जाम पड़ा है, जिससे भंडारण व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर कुणाल दुदावत ने मिलर्स की आपात बैठक लेकर उठाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासन द्वारा पर्याप्त समय और व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई थीं, इसके बावजूद निर्धारित तिथि तक कार्य पूरा न होना लापरवाही को दर्शाता है। प्रत्येक मिलर को दैनिक लक्ष्य तय कर तत्काल उठाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जानबूझकर देरी करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
उपार्जन केंद्रों में बड़ी मात्रा में धान जमा होने से मौसम परिवर्तन की आशंका के बीच नुकसान का खतरा भी बढ़ गया है। प्रशासन का कहना है कि किसानों की मेहनत की फसल सुरक्षित रखना प्राथमिकता है, इसलिए जल्द उठाव आवश्यक है। बैठक में मिलर्स ने परिवहन, मजदूरों की कमी और तकनीकी दिक्कतों का हवाला दिया, जिस पर प्रशासन ने आवश्यक सहयोग देने का भरोसा दिलाया, लेकिन कार्य में ढिलाई बर्दाश्त नहीं करने की बात दोहराई।
धान की मात्रा को लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है। कुछ केंद्रों में खरीदी गई मात्रा और वर्तमान भंडारण के आंकड़ों में अंतर सामने आया है। कहीं चूहों से नुकसान तो कहीं सूखत के कारण कमी की बात कही जा रही है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि अब उठाव की प्रगति की दैनिक समीक्षा की जाएगी, ताकि लंबित 3.92 लाख क्विंटल धान का शीघ्र निराकरण हो सके।


