होलिका दहन को लेकर इस बार लोगों में संशय की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि तिथि के दौरान चंद्र ग्रहण का प्रभाव भी पड़ रहा है। पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि के आधार पर होलिका दहन किया जाता है, लेकिन भद्रा काल और ग्रहण की स्थिति को ध्यान में रखते हुए शुभ मुहूर्त तय किया जाता है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि ग्रहण काल में किसी भी शुभ कार्य से परहेज करना चाहिए, इसलिए होलिका दहन का समय सावधानी से निर्धारित किया जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि पूर्णिमा तिथि में भद्रा का प्रभाव अधिक समय तक रहता है तो भद्रा समाप्ति के बाद ही होलिका दहन करना शुभ माना जाता है। साथ ही चंद्र ग्रहण के सूतक काल का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। इस कारण कुछ स्थानों पर आज रात तो कहीं कल होलिका दहन होने की संभावना जताई जा रही है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से होलिका दहन करने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। श्रद्धालुओं को सलाह दी जा रही है कि वे अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर के पुजारियों से सही समय की पुष्टि कर लें, ताकि परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना संपन्न की जा सके।


