देश के कई वन क्षेत्रों में बाघों और इंसानों के बीच टकराव तेजी से बढ़ रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती आबादी, जंगलों में अतिक्रमण और शिकार की कमी के कारण बाघों का व्यवहार बदल रहा है। भोजन और क्षेत्र की तलाश में बाघ अब मानव बस्तियों के करीब पहुंच रहे हैं, जिससे हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल 43 लोगों की मौत बाघ हमलों में हुई, जिसने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार घटते वन क्षेत्र और मानव गतिविधियों का दबाव बाघों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर धकेल रहा है। कई बार घायल या बूढ़े बाघ भी आसान शिकार की तलाश में गांवों का रुख करते हैं। इससे मानव-बाघ संघर्ष की स्थिति और गंभीर हो जाती है। वन विभाग ट्रैकिंग, कैमरा ट्रैप और रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए हालात संभालने की कोशिश कर रहा है।
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पर्यावरणविदों का मानना है कि स्थायी समाधान के लिए जंगलों का संरक्षण, बफर जोन की मजबूती और स्थानीय समुदायों को जागरूक करना जरूरी है। मुआवजा योजनाओं और त्वरित राहत व्यवस्था से प्रभावित परिवारों को सहायता दी जा सकती है, लेकिन दीर्घकालिक रणनीति के बिना इस बढ़ते संघर्ष को रोकना मुश्किल होगा।


