नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने ‘नोटा’ (None of the Above) को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि देश में मतदान प्रतिशत बढ़ाने और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए वोटिंग को अनिवार्य बनाने पर ठोस तंत्र विकसित करने की जरूरत है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि केवल नोटा का विकल्प देने से लोकतांत्रिक असंतोष का समाधान नहीं होता, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में व्यापक सुधार आवश्यक हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने दलील दी कि नोटा को अधिक प्रभावी बनाने और मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कानूनी ढांचा मजबूत किया जाए। इस पर शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि लोकतंत्र में मतदान अधिकार के साथ-साथ जिम्मेदारी भी है। यदि मतदान को अनिवार्य बनाने पर विचार किया जाता है तो उसके लिए स्पष्ट नियम, जागरूकता अभियान और दंडात्मक प्रावधान जैसे पहलुओं पर गंभीर मंथन जरूरी होगा।
read also: धोखाधड़ी का शिकार होने से बचे नील नितिन मुकेश, करोड़ों की डील कैंसिल कर इंडस्ट्री को दी चेतावनी
कोर्ट की इस टिप्पणी को चुनावी सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वोटिंग को अनिवार्य बनाने की दिशा में कदम उठाया जाता है तो इससे मतदान प्रतिशत में इजाफा हो सकता है, हालांकि इसके क्रियान्वयन से जुड़ी कई संवैधानिक और व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने आएंगी। अब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की भूमिका अहम मानी जा रही है।


