हालिया शोध में सामने आया है कि महिलाओं में लिगामेंट (Ligament) चोट का खतरा पुरुषों की तुलना में कई गुना अधिक होता है। विशेष रूप से घुटने की एसीएल (ACL) चोट के मामलों में यह अंतर साफ देखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि शारीरिक संरचना, मांसपेशियों की ताकत और बायोमैकेनिक्स में अंतर इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।
अध्ययन के अनुसार, महिलाओं में हार्मोनल बदलाव भी लिगामेंट की मजबूती और लचीलेपन को प्रभावित कर सकते हैं। मासिक चक्र के दौरान एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन का स्तर बदलने से लिगामेंट अधिक ढीले हो सकते हैं, जिससे चोट का जोखिम बढ़ जाता है। खेलकूद और फिटनेस गतिविधियों में भाग लेने वाली महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
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विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि सही वार्म-अप, मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम और संतुलित प्रशिक्षण कार्यक्रम अपनाकर चोट के खतरे को कम किया जा सकता है। इसके साथ ही कोच और फिटनेस ट्रेनर को भी महिलाओं की शारीरिक जरूरतों के अनुसार ट्रेनिंग प्लान तैयार करना चाहिए, ताकि गंभीर लिगामेंट चोटों से बचाव हो सके।






