नए वित्त वर्ष में महंगाई दर में बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक खाद्य कीमतों में तेजी के कारण महंगाई करीब 1.8% तक बढ़ सकती है। खासकर दाल, सब्जियों, अनाज और डेयरी उत्पादों की कीमतों में उछाल से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर दबाव बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सप्लाई चेन में बाधाएं और मौसम से जुड़ी अनिश्चितताएं भी खाद्य महंगाई को प्रभावित कर सकती हैं।
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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नई शृंखला में आधार प्रभाव (Base Effect) का असर अपेक्षाकृत कम रहेगा, जिससे वास्तविक महंगाई का रुझान अधिक स्पष्ट दिखाई देगा। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, अगर खाद्य कीमतों में स्थिरता नहीं आई तो आम उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार और केंद्रीय बैंक की नीतियां महंगाई को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाएंगी।


