सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों में मुफ्त योजनाओं (फ्रीबीज) को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि सरकारें केवल मुफ्त भोजन, साइकिल या नकद हस्तांतरण जैसी योजनाओं पर ही ध्यान केंद्रित करेंगी, तो देश का समग्र विकास कैसे होगा। अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि ऐसी योजनाएं लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय उन्हें सरकारी सहायता पर निर्भर बना सकती हैं।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारों का मुख्य उद्देश्य लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना, बुनियादी ढांचा विकसित करना और शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करना होना चाहिए। यदि संसाधनों का बड़ा हिस्सा केवल मुफ्त योजनाओं पर खर्च किया जाएगा, तो दीर्घकालिक विकास प्रभावित हो सकता है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि कल्याणकारी योजनाएं और मुफ्त सुविधाएं अलग-अलग चीजें हैं, और इनके बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकारों को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो लोगों को सशक्त बनाएं, न कि उन्हें स्थायी रूप से सहायता पर निर्भर करें। मुफ्त योजनाएं जरूरतमंदों के लिए अस्थायी राहत दे सकती हैं, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे में निवेश अधिक महत्वपूर्ण है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि सामाजिक कल्याण योजनाएं पूरी तरह गलत नहीं हैं, लेकिन उनका उद्देश्य लोगों को आत्मनिर्भर बनाना होना चाहिए। अदालत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देश में विभिन्न राज्यों द्वारा मुफ्त सुविधाओं और नकद सहायता योजनाओं की घोषणा को लेकर लगातार बहस चल रही है।
इस टिप्पणी को आर्थिक नीतियों और चुनावी वादों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह सरकारों को दीर्घकालिक विकास और वित्तीय अनुशासन पर ध्यान देने का संदेश देती है।


