घर बनाना हर व्यक्ति के जीवन का एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, घर निर्माण शुरू करते समय ग्रहों की स्थिति, गोचर और शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि सही समय और अनुकूल ग्रहों के प्रभाव में शुरू किया गया निर्माण कार्य न केवल बिना बाधा के पूरा होता है, बल्कि उस घर में रहने वालों को सुख, समृद्धि और मानसिक शांति भी मिलती है।
ज्योतिष के अनुसार, घर निर्माण शुरू करने के समय बृहस्पति (गुरु), शुक्र और बुध ग्रह का शुभ स्थिति में होना बहुत लाभकारी माना जाता है। बृहस्पति को धन, वृद्धि और समृद्धि का कारक माना जाता है। यदि गुरु अनुकूल गोचर में हो, तो घर निर्माण के दौरान आर्थिक स्थिरता बनी रहती है और कार्य सफलतापूर्वक पूरा होता है। शुक्र ग्रह सुख-सुविधा, वैभव और भौतिक आनंद का प्रतीक है, इसलिए शुक्र का शुभ प्रभाव घर को आरामदायक और सुखद बनाता है। बुध ग्रह बुद्धि, योजना और निर्णय क्षमता का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे निर्माण कार्य सही योजना के अनुसार आगे बढ़ता है।
इसके विपरीत, शनि, राहु और केतु के अशुभ गोचर में घर निर्माण शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। शनि की प्रतिकूल स्थिति निर्माण कार्य में देरी, अतिरिक्त खर्च और बाधाएं ला सकती है। वहीं राहु और केतु भ्रम, अचानक समस्याएं और विवाद पैदा कर सकते हैं। इसलिए ज्योतिषाचार्य सलाह देते हैं कि निर्माण शुरू करने से पहले कुंडली और ग्रहों की स्थिति का विश्लेषण अवश्य कराया जाए।
घर निर्माण की शुरुआत से पहले भूमि पूजन करना भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। भूमि पूजन के लिए शुभ तिथि, नक्षत्र और लग्न का चयन करना चाहिए। रोहिणी, मृगशिरा, हस्त, अनुराधा और उत्तर फाल्गुनी जैसे नक्षत्र भूमि पूजन और नींव रखने के लिए शुभ माने जाते हैं। इसके अलावा सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को भी निर्माण कार्य शुरू करना शुभ माना जाता है। अमावस्या, ग्रहण काल और अशुभ योग में निर्माण कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
चंद्रमा की स्थिति का भी विशेष महत्व होता है, क्योंकि चंद्रमा मन और मानसिक शांति का कारक है। यदि चंद्रमा शुभ और मजबूत स्थिति में हो, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सामंजस्य बना रहता है। ज्योतिषाचार्यों का यह भी मानना है कि केवल ग्रहों का गोचर ही नहीं, बल्कि वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करना भी आवश्यक है। सही दिशा में मुख्य द्वार, रसोई और पूजा स्थान बनाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।
अंत में, ज्योतिषाचार्य यह सलाह देते हैं कि घर निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य को शुरू करने से पहले किसी योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ से परामर्श लेकर शुभ मुहूर्त और ग्रहों की स्थिति की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। इससे निर्माण कार्य सुचारू रूप से पूरा होता है और घर में लंबे समय तक सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।


