देश में बढ़ती तीखी राजनीतिक बयानबाजी और विवादित भाषणों पर सुनवाई के दौरान Supreme Court of India ने कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि नेताओं के भाषणों से “माहौल जहरीला हो रहा है” और इससे समाज में विभाजन की भावना बढ़ती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका इस्तेमाल समाज में नफरत या वैमनस्य फैलाने के लिए नहीं होना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों को नसीहत देते हुए कहा कि वे अपने सार्वजनिक बयानों में संयम बरतें और देश में भाईचारे तथा सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा दें। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो सख्त दिशानिर्देश या कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। इस टिप्पणी को चुनावी माहौल में बढ़ती बयानबाजी के संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है।


