केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) में पदोन्नति को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, ग्राउंड स्तर पर लंबे समय तक सेवा देने वाले कमांडरों को प्रमोशन में अपेक्षित अवसर नहीं मिल पा रहे, जबकि केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर आने वाले IPS अधिकारियों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव आगे बढ़ रहा है। इस पूरे मसले में गृह मंत्रालय यानी Ministry of Home Affairs (MHA) की एक अहम सलाह अब तक फाइलों से बाहर नहीं आ सकी है, जिससे बलों के भीतर नाराजगी बढ़ रही है।
बताया जा रहा है कि CAPF के वरिष्ठ अधिकारियों ने पदोन्नति प्रक्रिया में संतुलन और कैडर मैनेजमेंट में पारदर्शिता की मांग की है। उनका तर्क है कि जो अधिकारी वर्षों तक नक्सल, आतंकवाद और सीमाई इलाकों में नेतृत्व करते हैं, उन्हें शीर्ष पदों तक पहुंचने का स्पष्ट रास्ता मिलना चाहिए। वहीं, केंद्र का मानना है कि IPS अधिकारियों की तैनाती से समन्वय और प्रशासनिक दक्षता बढ़ती है। हालांकि MHA की सिफारिशों पर अंतिम निर्णय लंबित रहने से यह मुद्दा फिलहाल सुलझता नजर नहीं आ रहा है।


