नई दिल्ली। केंद्र सरकार की PM Vishwakarma Yojana पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इस योजना के तहत बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, दर्जी, नाई, मोची जैसे 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि पारंपरिक हुनर को बढ़ावा देकर स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को मजबूत किया जाए।
पात्रता की बात करें तो आवेदनकर्ता भारतीय नागरिक होना चाहिए और संबंधित पारंपरिक पेशे से जुड़ा होना अनिवार्य है। लाभार्थियों को पहचान प्रमाण और बैंक खाते की जानकारी के साथ आवेदन करना होता है। योजना के तहत कौशल प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन भत्ता, टूलकिट के लिए वित्तीय सहायता और कम ब्याज दर पर ऋण की सुविधा दी जाती है। पहले चरण में 1 लाख रुपये तक और दूसरे चरण में 2 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना छोटे कारीगरों के लिए बड़ा सहारा साबित हो सकती है। डिजिटल लेनदेन और ब्रांडिंग सहायता के जरिए उनके उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने की भी व्यवस्था की गई है। इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक पोर्टल या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।


