साइबर क्राइम के एक चौंकाने वाले मामले में कंबोडिया में चल रहे फर्जी ‘पुलिस थाने’ का पर्दाफाश हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, अपराधी भारतीय नागरिकों को निशाना बनाने के लिए महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीरें लगाकर खुद को भारतीय पुलिस अधिकारी बताने का नाटक करते थे। वीडियो कॉल और नकली दस्तावेजों के जरिए लोगों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होने वाली है।
बताया जा रहा है कि ठग गिरोह ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर पीड़ितों को डराता था और फिर उनसे भारी रकम वसूलता था। कॉल सेंटर की तरह संचालित इस फर्जी सेटअप में कई लोग शामिल थे, जो हिंदी और अंग्रेजी में बात कर भारतीयों का भरोसा जीतते थे। शुरुआती जांच में करोड़ों रुपये की ठगी का अंदेशा जताया गया है।
साइबर विशेषज्ञों ने लोगों को आगाह किया है कि किसी भी अनजान वीडियो कॉल, पुलिस या सरकारी एजेंसी के नाम पर आने वाली धमकी भरी कॉल पर तुरंत भरोसा न करें। आधिकारिक नोटिस केवल निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही जारी किए जाते हैं। एजेंसियां अब इस अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह से जुड़े अन्य नेटवर्क की भी तलाश कर रही हैं।


