अमेरिका की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर चुनाव में कथित धांधली की जांच में दखल देने के आरोपों को लेकर उनकी ही रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सांसदों ने सवाल उठाए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन पर आरोप है कि उसने चुनावी अनियमितताओं से जुड़ी जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की। इस मुद्दे पर विपक्षी डेमोक्रेट्स पहले से हमलावर थे, लेकिन अब अपनी ही पार्टी के नेताओं के बयान से मामला और गंभीर हो गया है।
कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने कहा है कि चुनावी प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए नुकसानदेह हो सकता है। हालांकि, ट्रंप समर्थक गुट ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति केवल पारदर्शिता सुनिश्चित करना चाहते हैं।
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इस विवाद ने वॉशिंगटन की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ता है तो इसका असर आगामी चुनावी रणनीति और ट्रंप की राजनीतिक स्थिति पर पड़ सकता है। फिलहाल, इस मामले में आधिकारिक जांच और कांग्रेस की संभावित कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।


