राज्यसभा में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान एक भाजपा सांसद ने देश की बढ़ती अंतरिक्ष निर्भरता को लेकर चिंता जताई। सांसद ने कहा कि संचार, नेविगेशन, मौसम पूर्वानुमान और रक्षा जैसे अहम क्षेत्र आज अंतरिक्ष आधारित प्रणालियों पर निर्भर हैं, ऐसे में अंतरिक्ष सुरक्षा को नजरअंदाज करना देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। उन्होंने संसद में ‘स्पेस फोर्स’ जैसे समर्पित ढांचे की जरूरत पर जोर दिया।
भाजपा सांसद ने तर्क दिया कि कई देश अंतरिक्ष को नए युद्धक्षेत्र के रूप में देख रहे हैं और एंटी-सैटेलाइट हथियारों तथा साइबर हमलों का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में भारत को अपने उपग्रहों और अंतरिक्ष परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए अलग रणनीति और संस्थागत ढांचा तैयार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल रक्षा, बल्कि आर्थिक और तकनीकी हितों की रक्षा के लिए भी जरूरी है।
सरकार की ओर से जवाब में बताया गया कि भारत पहले ही अंतरिक्ष सुरक्षा को लेकर कई कदम उठा चुका है और इस क्षेत्र में क्षमताओं को मजबूत किया जा रहा है। हालांकि, सांसद द्वारा उठाए गए स्पेस फोर्स के सुझाव पर बहस छिड़ गई है और इसे भविष्य की सुरक्षा रणनीति के अहम हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।


