गलवां घाटी में भारत-चीन सैन्य तनाव के महज सात दिन बाद चीन द्वारा परमाणु परीक्षण किए जाने के अमेरिकी आरोपों ने अंतरराष्ट्रीय हलकों में हलचल मचा दी है। अमेरिकी रिपोर्ट्स का दावा है कि जून 2020 के घटनाक्रम के तुरंत बाद चीन ने गुप्त तरीके से परमाणु गतिविधि को अंजाम दिया, जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। हालांकि चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
अमेरिका के अनुसार, सैटेलाइट डेटा और खुफिया जानकारियों के विश्लेषण में संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिले हैं, जो परमाणु परीक्षण की ओर इशारा करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कदम न केवल अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौतों की भावना के खिलाफ है, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह चीन की रणनीतिक मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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इस पूरे मामले पर भारत समेत कई देश सतर्क नजर बनाए हुए हैं। कूटनीतिक स्तर पर इस मुद्दे के उठने से चीन पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है। वहीं, सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि गलवां के बाद इस तरह के आरोप भारत-चीन संबंधों की संवेदनशीलता और क्षेत्रीय स्थिरता की चुनौतियों को और उजागर करते हैं।


