भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी है। भारत 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद पर आगे बढ़ सकता है, जिसमें ‘मेक इन इंडिया’ को खास प्राथमिकता दी जाएगी। प्रस्ताव के मुताबिक, इन विमानों का बड़ा हिस्सा—करीब 80 फीसदी—देश में ही निर्माण किया जाएगा, जिससे स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मजबूत आधार मिलेगा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
सूत्रों के अनुसार, यह सौदा रणनीतिक जरूरतों के साथ-साथ तकनीक हस्तांतरण और घरेलू उद्योग को सक्षम बनाने पर केंद्रित होगा। भारत में निर्माण से न केवल लागत और रखरखाव में लाभ मिलेगा, बल्कि एयरोस्पेस सेक्टर में रोजगार और कौशल विकास को भी गति मिलेगी। वायुसेना के लिए यह कदम पुराने बेड़े की जगह आधुनिक प्लेटफॉर्म जोड़ने और परिचालन क्षमता बढ़ाने में अहम माना जा रहा है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि 114 राफेल के शामिल होने से भारत की वायु रक्षा क्षमता में गुणात्मक बढ़त आएगी। अत्याधुनिक सेंसर, हथियार प्रणालियां और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता के साथ राफेल फ्लीट क्षेत्रीय संतुलन को मजबूती दे सकती है। अब नजरें इस प्रस्ताव पर आगे की मंजूरियों और समय-सीमा पर टिकी हैं।


