अमेरिका और रूस के बीच आखिरी प्रमुख परमाणु हथियार नियंत्रण समझौते न्यू स्टार्ट (New START) के भविष्य को लेकर तनाव बढ़ता दिख रहा है। संधि की अवधि समाप्त होने से पहले रूस ने बयान देकर कहा है कि वह किसी भी स्थिति के लिए “तैयार” है। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के रिश्ते पहले से ही यूक्रेन युद्ध और आपसी आरोप-प्रत्यारोप के चलते बेहद निचले स्तर पर हैं।
न्यू स्टार्ट संधि के तहत दोनों देश अपने तैनात परमाणु हथियारों और लॉन्च सिस्टम की संख्या सीमित रखते हैं और एक-दूसरे की निगरानी की अनुमति देते हैं। अगर यह संधि खत्म हो जाती है या पूरी तरह निष्क्रिय हो जाती है, तो पहली बार दशकों में अमेरिका और रूस के बीच कोई प्रभावी परमाणु नियंत्रण व्यवस्था नहीं बचेगी। रूस का “हम तैयार हैं” वाला बयान संकेत देता है कि वह हथियारों की संख्या बढ़ाने या रणनीति बदलने जैसे कदमों के लिए मानसिक और तकनीकी रूप से तैयार है।
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इसके मायने वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से गंभीर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संधि के खत्म होने से परमाणु हथियारों की नई दौड़ शुरू हो सकती है, जिसका असर सिर्फ अमेरिका-रूस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की रणनीतिक स्थिरता पर पड़ेगा। आने वाले समय में कूटनीतिक बातचीत होती है या नहीं, इसी पर तय होगा कि दुनिया तनाव कम करने की दिशा में जाएगी या और ज्यादा अस्थिरता की ओर।


