भारत और चीन के बीच आर्थिक संबंधों में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 155.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में एक अहम बढ़ोतरी मानी जा रही है। सीमा विवाद और राजनीतिक तनाव के बावजूद व्यापारिक रिश्तों में आई यह तेजी बताती है कि आर्थिक जरूरतें दोनों देशों को करीब ला रही हैं।
व्यापार में इस बढ़ोतरी का बड़ा कारण इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स और कच्चे माल की मांग है। भारत जहां चीन से बड़ी मात्रा में औद्योगिक सामान और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद आयात करता है, वहीं भारत के निर्यात में केमिकल्स, लौह अयस्क और कृषि उत्पादों की अहम भूमिका रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सप्लाई चेन और निवेश सहयोग बढ़ने से व्यापार और मजबूत हो सकता है।
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हालांकि, भारत लगातार व्यापार घाटे को कम करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों के चलते भारत की रणनीति संतुलित व्यापार की दिशा में आगे बढ़ने की है। कुल मिलाकर, मौजूदा आंकड़े संकेत देते हैं कि भारत-चीन के आर्थिक रिश्ते राजनीतिक चुनौतियों के बीच भी नई दिशा पकड़ रहे हैं।


