आजकल सोशल मीडिया और योग शिविरों में यह दावा आम हो गया है कि नियमित योग अभ्यास से आंखों का चश्मा पूरी तरह हट सकता है। नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार, योग और आंखों के व्यायाम आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद जरूर हैं, लेकिन यह कहना कि योग से नंबर पूरी तरह खत्म हो जाएगा, पूरी तरह सही नहीं है। योग आंखों की मांसपेशियों को रिलैक्स करने, थकान कम करने और आंखों पर पड़ने वाले तनाव को घटाने में मदद करता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि त्राटक, पलक झपकाने का अभ्यास और आंखों की हल्की स्ट्रेचिंग जैसे योगासन स्क्रीन टाइम से होने वाली जलन, सूखापन और थकान में राहत दे सकते हैं। खासकर मोबाइल और कंप्यूटर के अधिक इस्तेमाल से जिन लोगों को आंखों में भारीपन या सिरदर्द की शिकायत रहती है, उन्हें योग से लाभ मिल सकता है। हालांकि मायोपिया, हाइपरमेट्रोपिया या एस्टिग्मैटिज्म जैसे रिफ्रैक्टिव एरर्स योग से पूरी तरह ठीक नहीं होते।
डॉक्टरों का कहना है कि योग को आंखों की देखभाल के सहा यक उपाय के रूप में अपनाना चाहिए, न कि इलाज के विकल्प के तौर पर। सही खानपान, नियमित आंखों की जांच और जरूरत पड़ने पर चश्मा या लेंस का इस्तेमाल जरूरी है। योग से आंखों की सेहत बेहतर हो सकती है, लेकिन चश्मा हटने के दावों को लेकर सतर्क रहना ही समझदारी है।


