अचानकमार : अचानकमार बाघ अभयारण्य में जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों को बाघ के दर्शन हुए। बीते कई सालों में यह पहली बार है जब सफारी पर आए पर्यटकों ने बाघ को प्रत्यक्ष रूप से देखा। इस दुर्लभ दृश्य ने न केवल पर्यटकों को रोमांचित किया, बल्कि वन विभाग के अधिकारियों में भी नई उम्मीद जगाई है।
अब तक सफारी में बाघ न दिखने से पर्यटकों को निराशा होती रही, जिसके कारण यह क्षेत्र कान्हा और बांधवगढ़ जैसे प्रसिद्ध अभयारण्यों की तुलना में कम आकर्षण का केंद्र बन पाया था। कोरबा की निवासी लक्ष्मी सिंह कंवर अपने परिवार के साथ शनिवार को भ्रमण पर आई थीं। उन्होंने मार्ग क्रमांक-2 पर बाघ को उसके प्राकृतिक परिवेश में देखा।
अनुभवी चालक छोटेलाल मरकाम और प्रशिक्षित गाइड कुशल तिलवानी के मार्गदर्शन में सफारी पूरी तरह सुरक्षित और अनुशासित ढंग से संचालित हुई, जिससे पर्यटकों को वन्यजीवन का संपूर्ण अनुभव मिला। दोपहर में रिजर्व पहुंचे इस परिवार को शाम की सफारी में शामिल होने का अवसर मिला। सफारी मार्ग पर आधी दूरी भी पूरी नहीं हुई थी कि चालक ने वाहन रोक दिया। कच्चे रास्ते को पार करते हुए एक बाघ जंगल की ओर बढ़ रहा था।
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पहले चालक और गाइड ने उसे देखा, फिर संकेत मिलने पर पर्यटकों की नजर भी उस पर जा टिकी। झाड़ियों की ओर बढ़ते बाघ को देख सभी रोमांचित हो उठे। कुछ देर बाद वाहन आगे बढ़ा तो बाघ एक पेड़ के नीचे खड़ा दिखाई दिया। लगभग एक मिनट तक रुकने के बाद वह जंगल में ओझल हो गया। पर्यटकों ने बताया कि बाघ की चाल धीमी थी और वह कुछ कमजोर प्रतीत हो रहा था, संभव है कि उसकी उम्र अधिक हो। इस दौरान पर्यटकों ने चलते बाघ की तस्वीरें भी लीं। सफारी के बाद परिवार ने प्रबंधन से मुलाकात कर अपनी खुशी साझा की और व्यवस्थाओं, सुरक्षा उपायों तथा मार्गदर्शन की सराहना की।


