केंद्रीय बजट को लेकर आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने कहा है कि मौजूदा आर्थिक चुनौतियों के बीच बजट में दीर्घकालिक दृष्टि का होना बेहद जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि केवल तात्कालिक राहत के बजाय संरचनात्मक सुधारों पर फोकस किया जाना चाहिए, ताकि अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती मिल सके। निवेश, रोजगार सृजन और उत्पादकता बढ़ाने वाले कदम बजट की प्राथमिकता होने चाहिए।
पूर्व गवर्नर के अनुसार, राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास को गति देना सरकार के लिए अहम चुनौती है। उन्होंने बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश को भविष्य की वृद्धि के लिए निर्णायक बताया। साथ ही, निजी निवेश को प्रोत्साहन देने और छोटे-मझोले उद्योगों को समर्थन देने की जरूरत पर भी बल दिया।
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उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में भारत को अपनी आर्थिक नींव मजबूत करनी होगी। स्थिर नीतियां, भरोसेमंद नियामक ढांचा और सुधारों की निरंतरता से ही अर्थव्यवस्था को लंबी अवधि में लाभ मिलेगा। आने वाला बजट इसी दिशा में ठोस संकेत देने वाला होना चाहिए।


