आईसीसी टूर्नामेंटों में खेलने से इनकार या बहिष्कार का इतिहास नया नहीं है। क्रिकेट की राजनीति, सुरक्षा चिंताएं और कूटनीतिक तनाव कई बार खेल पर भारी पड़े हैं। टी20 विश्व कप 2026 से पहले भी ऐसे कई मौके आए, जब टीमों ने आईसीसी आयोजनों में हिस्सा लेने से इनकार किया या आखिरी वक्त पर नाम वापस लिया, जिससे टूर्नामेंट की रूपरेखा तक प्रभावित हुई।
ऐसे ही चर्चित मामलों में 1970 का दक्षिण अफ्रीका बहिष्कार, 1980 और 1990 के दशक में रंगभेद और राजनीतिक कारणों से हुए विरोध, 1996 विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज का श्रीलंका दौरे से इनकार, और 2003 विश्व कप में इंग्लैंड का जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच न खेलना शामिल है। इसके अलावा सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान से जुड़ी कई श्रृंखलाओं और टूर्नामेंट मैचों में भी टीमों ने खेलने से परहेज किया।
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विशेषज्ञ मानते हैं कि आईसीसी टूर्नामेंटों में ऐसे फैसले खेल भावना से ज्यादा वैश्विक राजनीति और सुरक्षा हालात से जुड़े रहे हैं। टी20 विश्व कप 2026 से पहले बहिष्कार के पुराने मामलों की चर्चा इस बात की याद दिलाती है कि क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समीकरणों का भी अहम हिस्सा रहा है।


