डॉलर के मुकाबले रुपये की लगातार गिरती कीमत का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। कमजोर रुपये के कारण आयातित सामान महंगा हो गया है, जिससे ईंधन, इलेक्ट्रॉनिक्स और कच्चे माल की लागत बढ़ने की आशंका है। इसके अलावा विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और अंतरराष्ट्रीय यात्रा की योजना बना रहे लोगों के खर्च में भी इजाफा हो रहा है।
रुपये की कमजोरी से विदेशी विश्वविद्यालयों की फीस, हॉस्टल खर्च और रोजमर्रा के खर्च ज्यादा पड़ रहे हैं, वहीं विदेशी ट्रैवल पैकेज और हवाई टिकट भी महंगे हो गए हैं। इसका असर घरेलू महंगाई पर भी दिख सकता है, क्योंकि आयात लागत बढ़ने से कंपनियां कीमतें बढ़ा सकती हैं।
हालांकि, कमजोर रुपये से निर्यातकों को फायदा मिल रहा है। डॉलर में कमाई करने वाली आईटी, फार्मा और टेक्सटाइल जैसी निर्यात-आधारित कंपनियों की आय बढ़ने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रुपये में उतार-चढ़ाव पर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का अहम असर बना रहेगा।


