मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि गणतंत्र के अमृतकाल में आयोजित साहित्य उत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक चेतना और बौद्धिक विरासत का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि साहित्य किसी भी समाज की आत्मा होता है, जो उसकी परंपराओं, मूल्यों और विचारधारा को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाता है। ऐसे आयोजनों से न केवल रचनात्मकता को मंच मिलता है, बल्कि सामाजिक संवाद भी मजबूत होता है।
मुख्यमंत्री साय ने लेखकों, कवियों और साहित्यकारों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वे समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य उत्सव युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने और नए विचारों से प्रेरित करने का सशक्त माध्यम है। राज्य सरकार साहित्य, कला और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत है।
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उन्होंने विश्वास जताया कि इस तरह के साहित्यिक आयोजन छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, भाषा और परंपराओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री ने साहित्यकारों से समाज में सकारात्मक सोच, सद्भाव और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने का आह्वान भी किया।






