भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली से दलाल स्ट्रीट पर दबाव बना हुआ है। वैश्विक अनिश्चितताओं, ऊंची ब्याज दरों और डॉलर की मजबूती के बीच एफआईआई भारतीय इक्विटी से पूंजी निकालकर नॉर्थ एशिया के बाजारों—जैसे चीन, ताइवान और कोरिया—की ओर रुख कर रहे हैं। इसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिख रहा है, जहां सीमित दायरे में कारोबार के साथ कमजोरी का माहौल बना हुआ है।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, वैल्यूएशन को लेकर चिंताओं और वैश्विक स्तर पर बेहतर रिटर्न की संभावनाओं ने एफआईआई को भारत से दूरी बनाने पर मजबूर किया है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी से बाजार को कुछ हद तक सहारा मिल रहा है, लेकिन एफआईआई की बिकवाली के मुकाबले यह समर्थन फिलहाल नाकाफी नजर आ रहा है।
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अब निवेशकों की नजर आने वाले ‘पॉजिटिव ट्रिगर’ पर टिकी है, जिसमें महंगाई के आंकड़े, ब्याज दरों पर संकेत, कॉर्पोरेट नतीजे और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेत शामिल हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इन कारकों में सुधार के साथ ही एफआईआई का भरोसा लौट सकता है और बाजार में दोबारा मजबूती देखने को मिल सकती है।





