उपराष्ट्रपति ने सिखों के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान को धार्मिक स्वतंत्रता और मानव अधिकारों का अमर प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने अत्याचार और जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ खड़े होकर अपने प्राणों का बलिदान दिया, जो आज भी पूरे विश्व के लिए प्रेरणास्रोत है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का जीवन साहस, त्याग और नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण था। उन्होंने सत्य और न्याय की रक्षा के लिए जिस दृढ़ता के साथ संघर्ष किया, वह भारत की आत्मा में बसने वाले “सर्व धर्म समभाव” के सिद्धांत को सशक्त करता है।
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अपने संदेश में उपराष्ट्रपति ने देशवासियों से गुरु तेग बहादुर जी के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक सहिष्णुता, आपसी सम्मान और एकता ही मजबूत राष्ट्र की पहचान है, और गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान हमें इन्हीं मूल्यों की रक्षा के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा।


