रायपुर : रायपुर स्थित पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय में मेडिको-लीगल मामलों की जांच को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। स्वास्थ्य सेवाओं के सरलीकरण और अत्याधुनिकीकरण के क्रम में क्लिनिकल फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी (CFMT) यूनिट की शुरुआत की गई है। इस यूनिट का उद्घाटन स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किया। इसके साथ ही चिकित्सा महाविद्यालय के नवनिर्मित मुख्य प्रवेश द्वार का भी लोकार्पण किया गया।
यह CFMT यूनिट मध्य भारत की पहली और देश की बारहवीं ऐसी इकाई है, जहां मेडिको-लीगल मामलों से जुड़े पीड़ितों की वैज्ञानिक और सटीक जांच की सुविधा उपलब्ध होगी। यह यूनिट अंबेडकर अस्पताल के आपात चिकित्सा विभाग में स्थापित की गई है, जिससे अपराध से जुड़े मामलों में जांच और उपचार दोनों कार्य एक ही स्थान पर संभव हो सकेंगे।
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अपराध जांच में मिलेगी वैज्ञानिक मजबूती
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि बदलते समय के साथ अपराध की प्रकृति भी जटिल होती जा रही है। ऐसे में यह यूनिट पुलिस और न्यायपालिका को सटीक और वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया कि यहां चोटों की जांच, शराब सेवन की ब्रीथ एनालाइजर से पुष्टि, नशा करने वालों की यूरिन जांच तथा पॉक्सो कानून के तहत उम्र निर्धारण जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने यह भी बताया कि यह राज्य का पहला ऐसा संस्थान है, जहां एफटीए पेपर के माध्यम से खून के नमूनों को सुरक्षित रखकर डीएनए जांच की सुविधा दी जाएगी। इससे आपराधिक मामलों के शीघ्र और प्रभावी निपटारे में सहायता मिलेगी।
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इन मादक पदार्थों की हो सकेगी जांच
इस यूनिट में शराब के अलावा कई अन्य नशीले पदार्थों की भी जांच की सुविधा उपलब्ध होगी, जिनमें एम्फैटेमिन, बार्बिटुरेट्स, बेंजोडायजेपिन, कोकीन, मारिजुआना, मेथैम्फेटामाइन, ओपियोड (हेरोइन), फेनसाइक्लिडीन (पीसीपी), मॉर्फिन, मेथोडोन, एक्सटेसी और ट्राइसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट शामिल हैं।


