पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ (One Nation, One Election) की अवधारणा यदि लागू हो जाए, तो यह भारत के विकास के लिए परिवर्तनकारी साबित हो सकती है। उन्होंने यह बात गुरुवार को कही। कोविंद ने बताया कि उनकी अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है, जिसमें उन्होंने इस प्रणाली को लागू करने की सिफारिशें दी थीं।
उनका कहना है कि वर्तमान में बार-बार राज्य व लोकसभा चुनाव होने से प्रशासनिक संसाधनों पर भारी दबाव पड़ता है — खासकर शिक्षकों और अन्य सरकारी स्टाफ पर, जो चुनाव कार्यों में लग जाते हैं। इससे शिक्षा और अन्य सार्वजनिक सेवाओं में व्यवधान आता है। अगर चुनाव एक साथ हों, तो वही संसाधन विकास और कल्याण-कार्य योजनाओं में समर्पित हो सकेंगे।
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वहीं, कोविंद ने यह भी कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ से देश को आर्थिक लाभ हो सकता है — उस संसाधन व समय की बचत के कारण, जिसे चुनाव-चक्र में खर्च किया जाता है। यह बचत सरकार विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचा, सामाजिक कल्याण आदि में निवेश कर सकती है। सरकार ने 2024 में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ से संबंधित विधेयक लोकसभा में पेश किए थे। अब यह प्रस्ताव संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की प्रक्रिया से गुज़र रहा है।
कुल मिलाकर, रामनाथ कोविंद का मानना है कि यदि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ लागू हो जाता है, तो यह न सिर्फ चुनाव-व्यवस्था को सरल बनाएगा; बल्कि देश की विकास दिशा और भी तेज होगी।



