दिल्ली महिला आयोग (DCW) के ‘बंद’ होने और उसकी नियमित कार्यप्रणाली प्रभावित होने की खबरों पर न्यायालय ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि आयोग अपनी सेवाएं नहीं दे पाएगा, तो संकटग्रस्त महिलाएं मदद के लिए कहां जाएंगी?
सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से पूछा कि आयोग के कामकाज में बाधा क्यों उत्पन्न हुई और इसे सुचारू रूप से चलाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। अदालत ने कहा कि महिला सुरक्षा और सहायता से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की रुकावट बेहद चिंताजनक है, क्योंकि यह सीधे तौर पर उन महिलाओं को प्रभावित करता है जो घरेलू हिंसा, उत्पीड़न, शोषण या किसी भी तरह की आपात स्थिति में आयोग के पास पहुंचती हैं।
न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि सरकार तत्काल स्थिति स्पष्ट करे और सुनिश्चित करे कि DCW की हेल्पलाइन, जांच, बचाव अभियान और परामर्श सेवाएं बाधित न हों। अदालत का कहना है कि आयोग का अस्तित्व केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि दिल्ली की महिलाओं के लिए यह जीवन रक्षक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि आयोग की पहुंच और सेवाओं को बहाल करने पर काम तेजी से किया जा रहा है और किसी भी तरह की रुकावट दूर की जाएगी।


