Indo‑Tibetan Border Police (ITBP) ने 28 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्र अबूझमाड़ में एक नया सामरिक अड्डा (ऑपरेशन बेस) स्थापित किया। यह अड्डा नारायणपुर जिले के लंका गांव के पास है — जिला मुख्यालय से करीब 140 किलोमीटर दूर। अबूझमाड़, जिसे अक्सर “अनजान इलाका” कहा जाता रहा है, लगभग 4,000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यहाँ घने जंगलों, दुर्गम भूगोल और कठिन परिचालन हालात के कारण बीते दशकों में नक्सली गुटों का ठिकाना रहा है।
नया अड्डा केवल 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र सीमा से, जिससे इसे रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। इस कदम से नक्सलियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली आपूर्ति — रसद, हथियार एवं लोगों की आवाजाही — की कड़ी योजनाबद्ध रूप से बाधित होगी। एक अधिकारी के मुताबिक, यह आधार मुख्य “नक्सल गेटवे” को सील करने में मदद करेगा। यह अड्डा उन कई अभियान-अड्डों में से नौवां है, जिसे पिछले तीन महीनों में ITBP द्वारा अबूझमाड़ में स्थापित किया गया है।
केंद्रीय और राज्य सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर अबूझमाड़ की गहराई तक पहुँचने और वहां सरकार की संवेदनशीलता स्थापित करने का व्यापक कार्य शुरू किया है। केवल सुरक्षा ही नहीं — इन अड्डों के माध्यम से विकास, बुनियादी सुविधाओं, सड़कों एवं संपर्क मार्गों को भी शुरू करने की योजना है। यह रणनीति उस लक्ष्य का हिस्सा है, जिसे सरकार ने तय किया है — देश से वामपंथी उग्रवाद (Left-Wing Extremism, LWE) को मार्च 2026 तक समाप्त करने का।
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नया बेस न केवल सुरक्षाबलों के लिए होगा, बल्कि दूरदराज़ के आदिवासी इलाकों व गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने में भी सहायक होगा। इससे प्रशासन, विकास एजेंसियाँ, स्वास्थ्य-शिक्षा सुविधाएँ और बुनियादी ढांचा नेटवर्क इन पिछड़े क्षेत्र तक पहुँच सकेगा — जो पहले नक्सली हिंसा और असुरक्षित माहौल के कारण सम्भव नहीं था। सुरक्षा बलों की तैनाती और एंटी-नक्सल ऑपरेशनों के साथ अबूझमाड़ में स्थिरता बढ़ने की संभावना है, जिससे स्थानीय लोगों के जीवन व विकास की राह आसान हो सकती है।





