भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार त्रिपाठी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय नौसेना की निरंतर युद्ध तैयारी, सामरिक क्षमता और ऑपरेशनल दक्षता का प्रतीक है। उनका कहना है कि इस अभ्यास ने न केवल नौसेना की तात्कालिक प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत किया है, बल्कि समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की भारत की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया है।
एडमिरल त्रिपाठी के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य भारतीय महासागरीय क्षेत्र में किसी भी संभावित चुनौती के लिए त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया को परखना था।
इस ऑपरेशन में शामिल रहे: अत्याधुनिक युद्धपोत , पनडुब्बियाँ , नौसैनिक हेलीकॉप्टर और समुद्री गश्ती विमान , विशेष नौसैनिक कमांडो टीमें | इन सभी ने मिलकर समुद्री क्षेत्र में निगरानी, युद्ध तैयारी और सामरिक कार्रवाई की क्षमता का सफल प्रदर्शन किया।
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि मिशन में स्वदेशी युद्ध प्रणालियों, हथियारों और नौसैनिक तकनीकों का प्रभावशाली उपयोग भारतीय नौसेना की बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रमाण है।उन्होंने यह भी बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारतीय नौसेना ने यह संदेश दिया है कि देश की समुद्री सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी भी आपात स्थिति में जवाब देने के लिए नौसेना हर क्षण तैयार है।
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भारतीय नौसेना का यह अभियान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका और स्थिरता बनाए रखने के वैश्विक प्रयासों को भी मजबूती देता है।एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि बदलते भू-राजनीतिक माहौल में नौसेना का सतत अभ्यास और तत्परता अत्यंत आवश्यक है।





